बेटियों की सुरक्षा के लिए सड़कों पर ‘पुलिस दीदी’, एसपी स्वर्ण प्रभात ने दिखाई हरी झंडी

स्कूल-कॉलेज खुलने और छुट्टी के समय रहेगी विशेष निगरानी, मनचलों व असामाजिक तत्वों पर पुलिस की पैनी नजर

मोतिहारी। स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने तथा उनके आसपास असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से पूर्वी चंपारण पुलिस ने ‘पुलिस दीदी’ अभियान को सक्रिय रूप से मैदान में उतार दिया है। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने पुलिस केंद्र से ‘पुलिस दीदी’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और अभियान में शामिल पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण फोकस स्कूल और कॉलेजों के आसपास छात्राओं की सुरक्षा पर रहेगा। विशेष रूप से विद्यालय एवं महाविद्यालय खुलने और छुट्टी होने के समय पुलिस की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान मनचलों, असामाजिक तत्वों और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी।

पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट निर्देश दिया कि छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। स्कूल-कॉलेजों के आसपास नियमित गश्त के साथ ऐसी गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए, जिनसे छात्राओं में असुरक्षा या भय का माहौल पैदा हो।

सिर्फ गश्त नहीं, भरोसा कायम करने की पहल

‘पुलिस दीदी’ अभियान की अहमियत केवल पुलिस की मौजूदगी तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य छात्राओं और महिला पुलिसकर्मियों के बीच ऐसा विश्वास कायम करना भी है, जिससे किसी परेशानी, उत्पीड़न या असुरक्षा की स्थिति में छात्राएं बिना झिझक अपनी बात पुलिस तक पहुंचा सकें।

पुलिस की नियमित और दृश्यमान मौजूदगी जहां छात्राओं में सुरक्षा की भावना मजबूत करेगी, वहीं स्कूल-कॉलेजों के आसपास मंडराने वाले असामाजिक तत्वों के लिए भी स्पष्ट संदेश होगा कि उनकी गतिविधियां पुलिस की निगरानी से बाहर नहीं हैं।

बेटियों की पढ़ाई के रास्ते को सुरक्षित बनाने की कोशिश

किसी भी छात्रा के लिए शिक्षा का रास्ता तभी वास्तविक रूप से स्वतंत्र हो सकता है, जब उसे स्कूल या कॉलेज आते-जाते समय भय और असुरक्षा का सामना न करना पड़े। इसी सोच को जमीन पर उतारने की दिशा में ‘पुलिस दीदी’ अभियान महत्वपूर्ण पहल बन सकता है।

अब इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस की यह सक्रियता कितनी नियमित और प्रभावी रहती है। यदि स्कूल-कॉलेजों के आसपास लगातार निगरानी, संवाद और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है, तो ‘पुलिस दीदी’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि बेटियों के लिए सुरक्षा और भरोसे की पहचान बन सकती है।

विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
पूर्वी चंपारण जिला संवाददाता, बिहार

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