कलाई पर राखी, चेहरे पर मुस्कान और रिश्ते में विश्वास
रक्षाबंधन पर वर्दी का दिखा बेहद संवेदनशील चेहरा; मानसिक रूप से पीड़ित महिलाओं के बीच पहुंचकर बांटी खुशियां, राखी बंधवाई और निभाया सुरक्षा का रिश्ता
रक्सौल | विशेष रिपोर्ट — श्यामल प्रतीक
कभी यही वर्दी अपराधियों के सामने कानून की ताकत बनकर खड़ी होती है और कभी किसी जरूरतमंद के सामने भरोसे का हाथ बन जाती है। रक्षाबंधन के दिन हरैया थाना प्रभारी किशन कुमार की कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आई—जहां उनकी पहचान एक पुलिस अधिकारी से कहीं आगे, एक भाई के रूप में दिखाई दी।
हरैया थाना प्रभारी किशन कुमार रक्षाबंधन का पर्व मनाने माहेर ममता निवास पहुंचे। यहां रह रही मानसिक रूप से पीड़ित महिलाओं के साथ उन्होंने समय बिताया और त्योहार की खुशियां साझा कीं।
तस्वीरों में इस रिश्ते की आत्मीयता साफ दिखाई देती है। महिलाओं ने किशन कुमार की कलाई पर राखी बांधी, मिठाई खिलाई और रक्षाबंधन की परंपरा को निभाया। इस दौरान किशन कुमार भी बेहद सहज भाव से उनके बीच बैठे और उनकी खुशियों का हिस्सा बने।
यह सिर्फ राखी नहीं, भरोसे का धागा था
रक्षाबंधन में बांधा जाने वाला धागा सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। लेकिन माहेर ममता निवास में इस बार इस धागे के मायने कुछ और गहरे दिखाई दिए।
जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही इन महिलाओं के बीच एक पुलिस अधिकारी का त्योहार मनाने पहुंचना बताता है कि पुलिसिंग केवल अपराध रोकने और कानून लागू करने तक सीमित नहीं है। समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों को यह भरोसा दिलाना भी उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा है कि वे अकेले नहीं हैं।
कभी कानून की सख्ती, कभी रिश्तों की नरमी
थाना प्रभारी के रूप में किशन कुमार की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था संभालने की है। लेकिन रक्षाबंधन पर सामने आया उनका यह रूप संवेदनशील और समुदाय-केंद्रित पुलिसिंग की एक अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है।
एक ओर वर्दी कानून का अनुशासन बताती है, वहीं दूसरी ओर उसी वर्दी में मौजूद व्यक्ति की संवेदना समाज और पुलिस के बीच दूरी कम करती है।
माहेर ममता निवास की बहनों के बीच बिताए गए ये कुछ पल शायद किसी सरकारी आदेश या पुलिस डायरी का हिस्सा न बनें, लेकिन इंसानियत की डायरी में इनकी जगह जरूर बनती है।
वर्दी की खूबसूरती उसके सितारों में ही नहीं…
रक्षाबंधन की इन तस्वीरों का सबसे खूबसूरत संदेश यही है कि वर्दी की असली गरिमा केवल कंधों पर लगे सितारों या अधिकार में नहीं, बल्कि उस भरोसे में भी है जो समाज उससे महसूस करता है।
उस दिन माहेर ममता निवास में किशन कुमार की कलाई पर बंधी राखियां सिर्फ त्योहार की रस्म नहीं थीं—वे भरोसे, सुरक्षा और अपनेपन का प्रतीक बन गईं।
किशन कुमार वहां थाना प्रभारी बनकर पहुंचे थे, लेकिन जब लौटे तो उनकी कलाई पर कई बहनों का विश्वास बंधा था।
यही शायद पुलिसिंग का सबसे खूबसूरत चेहरा है—
जहां कानून के साथ इंसानियत भी चलती है।
विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
