थाने की हिरासत से चोर फरार: गिरफ्तारी की सफलता पर भारी पड़ी सुरक्षा की चूक

सीसीटीवी और ग्रामीणों की मदद से दो संदिग्धों तक पहुंची थी पुलिस, लेकिन आदापुर थाना परिसर से एक के फरार होने ने खड़े किए गंभीर प्रशासनिक सवाल

श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर
आदापुर (पूर्वी चंपारण)।

आदापुर में चोरी की एक घटना के उद्भेदन की दिशा में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों के सहयोग से दो संदिग्धों को पकड़कर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की, लेकिन इसी कार्रवाई के बीच थाना परिसर से हिरासत में रखे गए एक आरोपी के फरार हो जाने की घटना ने पूरी उपलब्धि पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। जिस आरोपी तक पहुंचने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी, उसका पुलिस हिरासत से निकल जाना कानून-व्यवस्था से अधिक थाने के भीतर की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की बड़ी चूक के रूप में सामने आया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को श्यामपुर बाजार स्थित विनोद प्रसाद की किराना दुकान का ताला तोड़कर चोरी की घटना को अंजाम दिया गया था। वारदात दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। फुटेज के आधार पर स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से घटना में शामिल एक संदिग्ध को यमुनापुर गांव से पकड़ा गया। उससे पूछताछ के बाद मिली जानकारी के आधार पर रामगढ़वा थाना क्षेत्र के मुंडला गांव से दूसरे संदिग्ध को भी पकड़कर आदापुर थाना लाया गया।

यहां तक पुलिस की कार्रवाई अपराध के उद्भेदन की दिशा में प्रभावी दिखाई देती है। सीसीटीवी फुटेज का इस्तेमाल, स्थानीय सूचना तंत्र का सहयोग और दूसरे संदिग्ध तक पहुंचना पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है। लेकिन शुक्रवार की सुबह इनमें से एक आरोपी के थाना परिसर से फरार हो जाने के बाद पूरी कार्रवाई का केंद्र ही बदल गया।

अपराधी को पकड़ना सफलता, हिरासत में सुरक्षित रखना भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी

पुलिस कार्रवाई की सफलता केवल किसी आरोपी को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं होती। गिरफ्तारी के बाद उसकी विधिसम्मत अभिरक्षा, सुरक्षा और आगे की कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करना भी पुलिस तंत्र की बुनियादी जिम्मेदारी है। ऐसे में थाना परिसर जैसी नियंत्रित और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील जगह से किसी आरोपी का फरार होना सामान्य घटना मानकर नहीं देखा जा सकता।

घटना के बाद पुलिस पदाधिकारियों और चौकीदारों की टीम फरार आरोपी की तलाश में भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाकों तथा संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण मामला और संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा फरार व्यक्ति की तलाश को अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकती है।

एक चूक ने पुलिस की पूरी मेहनत को किया प्रभावित

इस प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि पुलिस ने चोरी की घटना के बाद उपलब्ध तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय सहयोग के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में तत्परता दिखाई। यह पुलिस तंत्र की सफलता थी। लेकिन हिरासत में लिए गए आरोपी का फरार होना उसी सफलता के समानांतर एक ऐसी गंभीर चूक बन गया, जिसने पुलिस की पूरी कार्रवाई को कटघरे में ला खड़ा किया।

थाने के भीतर सुरक्षा व्यवस्था, हिरासत में रखे गए व्यक्तियों की निगरानी और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की जवाबदेही पुलिस व्यवस्था के मूलभूत हिस्से हैं। ऐसी घटना होने पर यह आवश्यक हो जाता है कि परिस्थितियों की विभागीय स्तर पर समीक्षा हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो।

सीमावर्ती आदापुर में पुलिस के सामने दोहरी चुनौती

भारत-नेपाल सीमा से सटे आदापुर जैसे संवेदनशील थाना क्षेत्र में पुलिस की जिम्मेदारी सामान्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक है। चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं के उद्भेदन के साथ-साथ पकड़े गए आरोपियों की सुरक्षित अभिरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

अब आदापुर पुलिस के सामने चुनौती केवल फरार आरोपी को दोबारा पकड़ने की नहीं है, बल्कि उस भरोसे को भी कायम रखने की है जो किसी अपराधी की गिरफ्तारी के बाद आम लोगों को पुलिस व्यवस्था से होता है।

सीसीटीवी फुटेज और ग्रामीणों के सहयोग से आरोपी तक पहुंचना पुलिस की उपलब्धि थी, लेकिन उसी आरोपी का थाना परिसर से फरार हो जाना उस उपलब्धि पर भारी पड़ गया। फरार आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी और इस सुरक्षा चूक की निष्पक्ष विभागीय समीक्षा ही अब इस पूरे प्रकरण में पुलिस की जवाबदेही और कार्यकुशलता की वास्तविक कसौटी होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *