रवांडा से सीख: जब नागरिक हाथ बढ़ाते हैं, शहर बदलने लगते हैं

हर महीने सामुदायिक श्रम की ‘उमुगांडा’ परंपरा बताती है—स्वच्छता और विकास में नागरिकों की नियमित भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण है

मूल आलेख: विनय कुमार
पर्यावरणविद् | मोतिहारी, पूर्वी चंपारण

संकलन, संपादन एवं प्रस्तुति: श्यामल प्रतीक
पत्रकार | रक्सौल, पूर्वी चंपारण

क्या हम अफ्रीकी देश रवांडा के नागरिकों से कुछ सीख सकते हैं? अपने मोहल्ले, बाजार और सार्वजनिक स्थानों के प्रति उनकी सामूहिक जिम्मेदारी हमें इस सवाल पर सोचने का अवसर देती है। रवांडा की ‘उमुगांडा’ व्यवस्था में लोग नियमित रूप से एक साथ जुटते हैं और अपने आसपास की जरूरतों के लिए श्रमदान करते हैं।

उमुगांडा आमतौर पर हर महीने के आखिरी शनिवार को सुबह आठ से ग्यारह बजे तक आयोजित होता है। शारीरिक रूप से सक्षम 18 से 65 वर्ष के रवांडावासियों के लिए इसमें भागीदारी अनिवार्य है। इसलिए इसे केवल स्वैच्छिक सफाई अभियान कहना अधूरा होगा; यह नियमों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से संचालित सामुदायिक व्यवस्था है।

इसके तहत लोग सार्वजनिक स्थानों और जलनिकासी मार्गों की सफाई, स्थानीय सड़कों की मरम्मत, मिट्टी के कटाव को रोकने और पौधारोपण जैसे काम करते हैं। स्थानीय जरूरतों के अनुसार सामुदायिक सुविधाओं के निर्माण में भी योगदान दिया जाता है। लोगों का समय और श्रम उनके अपने क्षेत्र के विकास से जुड़ता है।

इस पहल में नेतृत्व की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। राष्ट्रपति पॉल कागमे और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी नागरिकों के साथ उमुगांडा में शामिल हुए हैं। राष्ट्रपति के आधिकारिक विवरण में नवंबर 2011 में कागमे के स्थानीय निवासियों के साथ पौधारोपण करने का उल्लेख मिलता है। ऐसे उदाहरण सार्वजनिक जिम्मेदारी में नेतृत्व की प्रत्यक्ष भूमिका सामने रखते हैं।

पर्यावरण संरक्षण के लिए रवांडा ने नीतिगत कदम भी उठाए हैं। वहाँ पॉलीथीन बैग पर 2008 में प्रतिबंध लगाया गया और 2019 में अन्य एकल-उपयोग प्लास्टिक उत्पादों तक प्रतिबंध का दायरा बढ़ाया गया। देश में वृक्षारोपण और वन संरक्षण के कार्यक्रम भी चलाए गए हैं। पर्यावरण मंत्रालय की 2019 की जानकारी में वन आवरण 30.4 प्रतिशत बताया गया था। इस आँकड़े को उसके वर्ष के साथ समझना चाहिए; इसमें प्राकृतिक वनों के अलावा वृक्षारोपण और दूसरी वनस्पति श्रेणियाँ भी शामिल हैं।

हमारे लिए इसकी सबसे उपयोगी सीख नियमितता और साझा जिम्मेदारी है। रक्सौल हो, मोतिहारी हो या कोई दूसरा शहर—नगर निकाय, व्यापारी, सामाजिक संगठन और स्थानीय निवासी मिलकर हर महीने एक निश्चित दिन स्वैच्छिक सामुदायिक कार्य तय कर सकते हैं। किसी महीने सार्वजनिक परिसर की सफाई, अगले महीने पौधों की देखभाल और फिर कचरा अलग रखने के लिए घर-घर संवाद जैसे छोटे काम चुने जा सकते हैं।

ऐसी पहल की सफलता के लिए काम के बाद की व्यवस्था भी तय होनी चाहिए। एकत्र कचरा कहाँ जाएगा, लगाए गए पौधों को पानी कौन देगा और अगली बैठक में प्रगति कौन बताएगा—इन सवालों के स्पष्ट उत्तर जरूरी हैं। नगर निकाय को नियमित सफाई, कचरा उठाने, संसाधन उपलब्ध कराने और प्रशिक्षित कर्मचारियों से तकनीकी कार्य कराने की अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। नागरिक भागीदारी इन सेवाओं को मजबूत कर सकती है।

रवांडा की यह परंपरा हमें अपने शहर से रिश्ता गहरा करने की प्रेरणा देती है। साफ सड़क, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और जीवित पौधे किसी एक दिन के प्रयास से नहीं बनते। उनके लिए लगातार काम करना पड़ता है।

अपने शहर को बेहतर बनाने की शुरुआत एक छोटे संकल्प से हो सकती है—हम हर महीने अपने मोहल्ले के लिए कुछ समय देंगे और किए गए काम की देखभाल भी करेंगे।

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