नशे के नेटवर्क पर चोट, अवैध हथियारों के मामलों में सजा: स्वर्ण प्रभात की रणनीति का असर

हरसिद्धि में कथित सरगना की गिरफ्तारी से लेकर आर्म्स एक्ट के प्रकरणों में 52 के विरुद्ध दोष साबित होने तक, पूर्वी चंपारण में अनुसंधान और अभियोजन पर जोर

विशेष कवर स्टोरी | श्यामल प्रतीक

मोतिहारी। पूर्वी चंपारण में नशे और अवैध हथियारों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। संदिग्ध वाहनों से मादक पदार्थों की बरामदगी, पूछताछ से मिले सुरागों पर कथित सरगनाओं और सप्लायरों की गिरफ्तारी तथा न्यायालय में दोष साबित होने के परिणाम इस अभियान की दिशा सामने रखते हैं। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में चल रही कार्रवाई का असर हरसिद्धि में गांजे की खेप से जुड़े कथित सरगना की गिरफ्तारी और आर्म्स एक्ट के मामलों में सामने आए अदालती परिणामों में दिखाई देता है।

हरसिद्धि में एसपी को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने थाना के सामने वाहन जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, काले रंग की एक कार की पिछली सीट के नीचे बने गुप्त तहखाने से 17 पोटलियों में रखा करीब 59 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। मौके से पकड़े गए दो आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस झड़वा गाँव स्थित नाजिम खान के घर पहुँची। वहाँ से 135 ग्राम गांजे का नमूना और इलेक्ट्रॉनिक तराजू बरामद होने की जानकारी दी गई। पुलिस ने नाजिम को इस नेटवर्क का कथित मुख्य सरगना बताया है। तीनों आरोपियों को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

इस कार्रवाई का महत्वपूर्ण पक्ष जाँच का विस्तार है। वाहन से बरामद खेप के बाद मिले सुरागों पर पुलिस ने दूसरे ठिकाने पर छापेमारी की और कथित संचालक तक पहुँची। स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व वाले अभियान में सूचना पर कार्रवाई और पूछताछ से सामने आई अगली कड़ी की पड़ताल का यह ठोस उदाहरण है। इसमें स्थानीय पुलिस टीम की तत्परता और मैदानी कार्रवाई की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।

डुमरियाघाट में जून 2026 की कार्रवाई में भी ऐसा ही क्रम सामने आया था। एसपी के निर्देश पर पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने एनएच-27 पर एक कार से 10.54 किलोग्राम अफीम जैसा मादक पदार्थ बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर गोविंदगंज क्षेत्र में छापेमारी हुई और कथित मुख्य सप्लायर की गिरफ्तारी के साथ कुल चार आरोपी पकड़े गए। दोनों मामलों में जाँच परिवहन में शामिल आरोपियों से आगे आपूर्ति से जुड़े व्यक्तियों तक पहुँची।

सीमावर्ती रक्सौल में अक्टूबर की कार्रवाई पुलिस और एसएसबी के समन्वय का उदाहरण है। हरैया पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने एक वाहन के गुप्त हिस्से से 365 नशीले इंजेक्शन बरामद करने की जानकारी दी थी। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। सीमा क्षेत्र में सूचना साझा करने और संयुक्त जांच की उपयोगिता ऐसी कार्रवाइयों से सामने आती है।

अवैध हथियारों के मामलों में भी पुलिस ने उल्लेखनीय अदालती परिणामों की जानकारी दी है। पुलिस कार्यालय के अनुसार, 1 जनवरी से 14 अक्टूबर 2026 के बीच आर्म्स एक्ट से जुड़े प्रकरणों में कुल 52 के विरुद्ध दोष साबित हुए। इस संख्या में वयस्क अभियुक्तों के साथ विधि से संघर्षरत किशोर भी शामिल हैं। वयस्कों से जुड़े संबंधित मामलों में 15 महीने से तीन वर्ष तक कारावास की सजा सुनाए जाने की जानकारी दी गई है। किशोरों से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई का उल्लेख है।

इन प्रकरणों में देसी कट्टे, पिस्टल, अर्धनिर्मित पिस्टल, बंदूकें और जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। संबंधित मामले डुमरियाघाट, गोविंदगंज, केसरिया, पिपरा, मेहसी, मुफ्फसिल, मधुबन, कल्याणपुर, छतौनी, हरसिद्धि, रामगढ़वा, कुंडवाचैनपुर और संग्रामपुर सहित विभिन्न थाना क्षेत्रों से जुड़े हैं। पुलिस ने इन परिणामों के पीछे अनुसंधान और न्यायालय में साक्ष्यों की प्रभावी प्रस्तुति को महत्वपूर्ण बताया है। यह उपलब्धि जब्ती के दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामलों को आगे बढ़ाने की अहमियत रेखांकित करती है।

नशाविरोधी अभियान का व्यापक दायरा सितंबर 2026 में जारी पिछले दो वर्षों के पुलिस आँकड़ों से भी समझा जा सकता है। इस अवधि में मादक पदार्थों से जुड़े 531 मामले दर्ज किए गए और 669 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बरामद पदार्थों की कुल अनुमानित कीमत करीब 52.66 करोड़ रुपये बताई। विवरण में 8,967.024 किलो गांजा, 117.7094 किलो चरस, 52.516 किलो अफीम, 22.379 किलो स्मैक और 2.6835 किलो ब्राउन शुगर की बरामदगी दर्ज है।

इसी सितंबर के पुलिस विवरण के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में 100 दोषियों को न्यायालय से सजा मिली। इनमें 64 को सात वर्ष या उससे अधिक का कारावास सुनाया गया। सजा पाए मामलों में पुराने वर्षों में दर्ज मुकदमे भी शामिल हैं। ये परिणाम लंबित मामलों में अनुसंधान और प्रभावी पैरवी की भूमिका सामने रखते हैं। आर्म्स एक्ट और मादक पदार्थों के ये आँकड़े अपनी-अपनी अलग अवधि और श्रेणी से संबंधित हैं।

पुलिस के अनुसार, स्वर्ण प्रभात ने अपराध नियंत्रण के लिए नेटवर्क की पहचान, प्रभावी अनुसंधान, मामलों की निगरानी और त्वरित निष्पादन पर जोर दिया है। उपलब्ध कार्रवाइयों का क्रम देखें तो सूचना के आधार पर जांच, अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय, आरोपियों से मिले सुरागों पर अगली छापेमारी और न्यायालय में प्रभावी पैरवी—इन सभी स्तरों पर काम दिखाई देता है। जिला नेतृत्व के निर्देशन के साथ थाना पुलिस, विशेष टीमों और अभियोजन की भूमिका इन परिणामों में जुड़ती है।

पूर्वी चंपारण में इस अभियान का महत्व नागरिक सुरक्षा से जुड़ा है। नशे की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क की पहचान और अवैध हथियारों के मामलों में दोषियों की जवाबदेही तय होना अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। हरसिद्धि में कथित सरगना तक पहुँची जाँच और हथियारों के मामलों में अदालती परिणाम स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में जारी कार्रवाई की ठोस तस्वीर पेश करते हैं। पुलिस अब तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और आगे की कार्रवाई में जुटी है।

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