नेपाल विशेष
घटस्थापना से बढ़ी चहल-पहल; मंदिर समिति के अध्यक्ष के अनुसार महाअष्टमी पर करीब चार हजार पशुबलि की परंपरा
श्यामल प्रतिक | रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर
रक्सौल/वीरगंज। नवरात्र के अवसर पर वीरगंज स्थित गहवामाई मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। घटस्थापना से ही दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का आगमन बढ़ गया है। नेपाल के मधेश प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुँच रहे हैं। पूजा-अर्चना और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों से मंदिर परिसर में विशेष चहल-पहल है।
मधेश प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल गहवामाई मंदिर में पर्सा, बारा, रौतहट, सर्लाही और महोत्तरी सहित विभिन्न जिलों के श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। दशहरे के दौरान यहाँ विशेष पूजा, मनौती और चढ़ावा अर्पित करने की परंपरा है। श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता की आराधना करते हैं।
माईस्थान मंदिर गहवामाई प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नरेंद्र शाह ने बताया कि दशहरे के दौरान नेपाल और भारत से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उनके अनुसार, महाअष्टमी का मंदिर में विशेष धार्मिक महत्व है और इस दिन अन्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ रहती है।
शाह के मुताबिक, श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर अथवा उसकी पूर्ति की कामना के साथ मनौती के रूप में पशुबलि चढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रत्येक वर्ष महाअष्टमी के दिन लगभग चार हजार पशुओं की बलि चढ़ाई जाती है।
मंदिर में महिलाओं द्वारा निभाई जाने वाली ‘खोड़च’ भरने की परंपरा का भी विशेष स्थान है। परिवार की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और संतान के कल्याण की कामना से महिलाएँ पूजा करती हैं। मनोकामना पूरी होने पर घर में शुद्धता के साथ तैयार पकवान और फल अर्पित कर यह परंपरा निभाई जाती है।
दशहरे के फूलपाती दिवस पर मंदिर में विशेष धार्मिक और औपचारिक कार्यक्रम होता है। नेपाली सेना, जिला प्रशासन कार्यालय पर्सा, जिला पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और मालपोत कार्यालय के प्रतिनिधियों की भागीदारी में फूलपाती की सलामी तथा पूजा-अर्चना की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद धार्मिक विधि के अनुसार कद्दू और बकरे की बलि दी जाती है।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। जिला पुलिस कार्यालय पर्सा की ओर से भीड़ नियंत्रण, श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है।
वीरगंज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा गहवामाई मंदिर दशहरे पर नेपाल और भारत के श्रद्धालुओं की साझा आस्था का केंद्र बनता है। सीमापार से आने वाले भक्तों की भागीदारी दोनों देशों के लोगों के बीच सदियों से चले आ रहे सांस्कृतिक जुड़ाव की झलक भी प्रस्तुत करती है।
