खेप से सरगना तक पहुँची कार्रवाई, स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में नशे के नेटवर्क पर प्रहार

हरसिद्धि में करीब 59 किलो गांजा और कथित सरगना की गिरफ्तारी ने दिखाया अभियान का असर; पूर्वी चंपारण में बरामदगी, नेटवर्क की जाँच और प्रभावी अभियोजन पर जोर

विशेष कवर स्टोरी | श्यामल प्रतीक

मोतिहारी। पूर्वी चंपारण में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण तस्वीर हरसिद्धि की कार्रवाई से सामने आई है। कार में छिपाकर लाई जा रही गांजे की खेप पकड़ने के बाद पुलिस की जाँच उस व्यक्ति तक पहुँची, जिसे वह इस नेटवर्क का मुख्य संचालक बता रही है। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में जारी अभियान में यह कार्रवाई इसलिए अहम है कि इसमें मादक पदार्थ की बरामदगी के साथ कथित सरगना की गिरफ्तारी भी हुई। जिले की कुछ अन्य कार्रवाइयों में भी परिवहन से जुड़े आरोपियों से मिले सुराग के आधार पर सप्लायर तक पहुँचने का क्रम दिखाई देता है।

हरसिद्धि में एसपी को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने थाना के सामने वाहन जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, एक काले रंग की कार की पिछली सीट के नीचे बने गुप्त तहखाने से 17 पोटलियों में रखा करीब 59 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। मौके से पकड़े गए दो आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस झड़वा गाँव स्थित नाजिम खान के घर पहुँची। वहाँ से 135 ग्राम गांजे का नमूना और इलेक्ट्रॉनिक तराजू मिलने की जानकारी दी गई। पुलिस ने नाजिम को गिरोह का कथित मुख्य सरगना बताया है। तीनों आरोपियों को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

इस कार्रवाई के क्रम से सूचना पर त्वरित कार्रवाई और मिले सुरागों पर आगे बढ़ने की कार्यपद्धति सामने आती है। एक वाहन की तलाशी से शुरू हुई जाँच दूसरे ठिकाने और कथित संचालक तक पहुँची। स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व वाले अभियान के असर को समझने के लिए यही ठोस पहलू महत्वपूर्ण है: बरामद खेप से जुड़े लोगों की भूमिकाएँ तलाशना और अगली कड़ी पर कार्रवाई करना। इस परिणाम में जिला स्तर के निर्देशन के साथ स्थानीय पुलिस टीम की पूछताछ और छापेमारी की भूमिका भी स्पष्ट है।

डुमरियाघाट की कार्रवाई इसका एक और उदाहरण है। जून 2026 में एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने एनएच-27 पर एक कार से 10.54 किलोग्राम अफीम जैसा मादक पदार्थ बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर गोविंदगंज क्षेत्र में छापेमारी हुई और पुलिस ने कथित मुख्य सप्लायर को भी गिरफ्तार किया। इस तरह उस मामले में गिरफ्तारियों की संख्या चार हो गई। यह मामला भी बताता है कि जाँच वाहन में मिले आरोपियों से आगे आपूर्ति से जुड़े व्यक्ति तक पहुँची।

सीमा क्षेत्र में एजेंसियों का समन्वय भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अक्टूबर में रक्सौल में हुई कार्रवाई के दौरान हरैया पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने एक वाहन के गुप्त हिस्से से 365 नशीले इंजेक्शन बरामद करने की जानकारी दी थी। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। ऐसी कार्रवाइयाँ स्थानीय पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के बीच सूचना तथा कार्रवाई के तालमेल की उपयोगिता सामने लाती हैं।

जिले में अभियान का दायरा सितंबर 2026 में सार्वजनिक हुए पुलिस आँकड़ों से भी समझा जा सकता है। पुलिस के इस विवरण के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में मादक पदार्थों से जुड़े 531 मामले दर्ज किए गए और 669 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बरामद पदार्थों की कुल अनुमानित कीमत पुलिस ने करीब 52.66 करोड़ रुपये बताई। उसी विवरण में 8,967.024 किलो गांजा, 117.7094 किलो चरस, 52.516 किलो अफीम, 22.379 किलो स्मैक और 2.6835 किलो ब्राउन शुगर की बरामदगी दर्ज है। ये सितंबर 2026 में जारी पिछले दो वर्षों के आँकड़े हैं।

अभियोजन के स्तर पर भी उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। सितंबर 2026 के पुलिस विवरण के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में 100 दोषियों को न्यायालय से सजा मिली। इनमें 64 को सात वर्ष या उससे अधिक का कारावास सुनाया गया। सजा पाए मामलों में पुराने वर्षों में दर्ज मुकदमे भी शामिल हैं। यह उपलब्धि लंबित मामलों में साक्ष्य संकलन और प्रभावी पैरवी के महत्व को रेखांकित करती है।

पुलिस के अनुसार, स्वर्ण प्रभात ने नेटवर्क की पहचान, प्रभावी अनुसंधान और मामलों की निगरानी पर जोर दिया है। हालिया कार्रवाइयों में सूचना के आधार पर जांच, दूसरी एजेंसियों के साथ संयुक्त अभियान और पूछताछ से मिले सुरागों पर आगे की छापेमारी इसी दिशा के व्यावहारिक उदाहरण हैं।

नशे के कारोबार से समाज को बचाने के लिए आपूर्ति से जुड़ी कड़ियों तक पहुँचना और साक्ष्यों के साथ मामलों को न्यायालय तक ले जाना आवश्यक है। पूर्वी चंपारण में सामने आए ये उदाहरण स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व और पुलिस टीमों की मैदानी कार्रवाई का असर दिखाते हैं। हरसिद्धि में कथित सरगना तक पहुँची जाँच ने इसी अभियान को एक और महत्वपूर्ण सफलता दी है; नेटवर्क के अन्य लोगों की पहचान की पड़ताल जारी है।

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