पप्पू यादव के बयान पर अनंत सिंह ने खोला मोर्चा; मह‍िला आयोग ने भी मांगा स्‍पष्‍टीकरण

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के महिलाओं पर दिए गए विवादित बयान के बाद राज्य महिला आयोग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है और संतोषजनक जवाब न मिलने पर लोकसभा सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा की चेतावनी दी है।

डिजिटल डेस्क, पटना। महिलाओं को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।

राज्य महिला आयोग ने उनके बयान को गंभीरता से लेते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर लोकसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा की जाएगी।

आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा ने कड़े शब्दों में कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के सम्मान पर चोट पहुंचाने वाले बयान किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हैं।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सांसद के परिवार में ही महिला जनप्रतिनिधि हैं, तब ऐसा बयान और भी आपत्तिजनक हो जाता है।

क्या है पूरा विवाद?

मंगलवार को फेसबुक लाइव के दौरान पप्पू यादव ने कहा था कि राजनीति में आने के लिए महिलाओं को शोषण का सामना करना पड़ता है।

उनके बयान का सबसे विवादित हिस्सा यह रहा कि राजनीति में सक्रिय महिलाएं ‘किसी न किसी नेता के साथ बेड शेयर करके आगे बढ़ती हैं’।

इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक हलकों से लेकर सामाजिक संगठनों तक तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

आयोग का नोटिस और सख्त रुख

महिला आयोग की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि यह बयान न सिर्फ महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है, बल्कि समाज में उनकी प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाता है।

नोटिस में पूछा गया है कि आखिर क्यों न उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की जाए।

पप्पू यादव का जवाब—‘नोटिस कूड़ेदान में’

विवाद बढ़ने के बावजूद पप्पू यादव अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने आयोग के नोटिस को ‘रद्दी की टोकरी में फेंक देने’ की बात कहकर अपने तेवर और कड़े कर दिए हैं।

अनंत सिंह का तीखा हमला

इधर मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह ने भी पप्पू यादव पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने से पहले उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की टिप्पणी महिलाओं के प्रति अपमानजनक है और इसे किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता।

राजनीति में बढ़ता दबाव

इस पूरे विवाद ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है। एक ओर महिला आयोग सख्त कार्रवाई के संकेत दे रहा है, तो दूसरी ओर राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।

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