अबेई में मानवता की पुकार: घायलों का सहारा बने संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिक

ड्रोन हमलों के बाद चिकित्सा सहायता, घायलों की निकासी और आग रोकने में जुटीं टीमें; निर्दोष नागरिकों की मौत ने उठाया जवाबदेही का सवाल

विशेष कवर स्टोरी | श्यामल प्रतीक

अबेई-अक्टूबर को अमिएत बाजार और टोडाच के निकट हुए ड्रोन हमलों ने नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिलाओं और बच्चों समेत दर्जनों नागरिकों की मौत तथा अनेक लोगों के घायल होने के बीच संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों, चिकित्सा कर्मियों और आपात प्रतिक्रिया दलों ने राहत एवं बचाव की जिम्मेदारी संभाली। प्रभावित क्षेत्र में उनका काम घायलों तक उपचार पहुंचाने, उन्हें सुरक्षित निकालने और आग को फैलने से रोकने पर केंद्रित रहा।

संयुक्त राष्ट्र की UNifeed सेवा के 21 अक्टूबर के अपडेट के अनुसार, अबेई के लिए संयुक्त राष्ट्र अंतरिम सुरक्षा बल—UNISFA—ने कम-से-कम 80 लोगों के मारे जाने और संयुक्त राष्ट्र कर्मियों द्वारा 27 घायलों का उपचार किए जाने की जानकारी दी। यह अंतिम मृत्यु संख्या नहीं है। महासचिव के बयान में अनेक लोगों के लापता होने और हताहतों की पुष्टि जारी रहने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई गई थी।

हमलों के बाद मिशन ने चिकित्सा कर्मियों, अग्निशमन संसाधनों और त्वरित प्रतिक्रिया बलों को तैनात किया। इस कार्रवाई में चिकित्सा सहायता और सुरक्षा से जुड़ी क्षमताओं को एक साथ लगाया गया, ताकि प्रभावित लोगों तक आपात मदद पहुंच सके और घायलों की निकासी में सहायता मिले।

चिकित्सा टीमों का कार्य तत्काल उपचार उपलब्ध कराना था। साथ ही, मिशन ने घायलों को घटनास्थल से निकालने की प्रक्रिया में सहयोग किया। ऐसी परिस्थितियों में उपचार तक पहुंचने में होने वाली देरी गंभीर परिणाम ला सकती है। इसलिए आपात चिकित्सा और निकासी का समन्वय जीवन बचाने के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आग को फैलने से रोकना भी राहत अभियान की बड़ी जिम्मेदारी रही। UNISFA ने इसके लिए अग्निशमन संसाधन लगाए। वहीं, त्वरित प्रतिक्रिया बलों की तैनाती ने आपात सहायता की व्यवस्था को सहारा दिया। इन कार्यों से स्पष्ट होता है कि संकट के समय शांति मिशन को एक साथ कई स्तरों पर काम करना पड़ता है।

क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए मिशन स्थानीय अधिकारियों और सामुदायिक नेताओं के संपर्क में भी है। हमले के बाद संवाद बनाए रखना तनाव कम करने और लोगों में भरोसा लौटाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। राहत, सुरक्षा और संवाद की यह संयुक्त भूमिका संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों की जिम्मेदारियों को सामने लाती है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने हमलों की कड़ी निंदा करते हुए शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने पर अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रतिबंध की याद दिलाई। महासचिव ने संघर्ष के सभी पक्षों से नागरिकों की रक्षा करने, आगे हमले रोकने और अबेई की विसैन्यीकृत स्थिति बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

इस त्रासदी से एक बुनियादी मानवीय सवाल उठता है—निर्दोष लोगों को मारकर आखिर हासिल क्या होता है? किसी परिवार के लिए अपने सदस्य की मृत्यु जीवन भर का अभाव बन सकती है। घायल व्यक्ति को लंबे उपचार, कमाई के नुकसान और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है। किसी बच्चे की मृत्यु के साथ उसके भविष्य की सभी संभावनाएँ समाप्त हो जाती हैं। नागरिकों की ऐसी कीमत को किसी राजनीतिक या सैन्य सफलता के दावे से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

अबेई में संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों और सहयोगी दलों के प्रयासों का महत्व इसी मानवीय जरूरत से जुड़ा है: घायल को समय पर सहायता मिले, राहत कार्य आगे बढ़ें और समुदायों में शांति लौटे। उनकी सेवा का सम्मान करने के साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन और सहयोग उपलब्ध हों।

पीड़ित परिवारों को विश्वसनीय जानकारी, घायलों को निरंतर उपचार और प्रभावित समुदायों को सुरक्षा चाहिए। हमलों के घटनाक्रम की निष्पक्ष जाँच तथा जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी उतनी ही आवश्यक है। हर नागरिक को इस भरोसे के साथ जीने का अधिकार है कि उसका जीवन सुरक्षित रहेगा।

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