चार दोषियों को सात-सात वर्ष और एक को तीन वर्ष की कैद; जांच से लेकर दोषसिद्धि तक योगदान देने वाली टीम को एसपी विनय तिवारी ने किया सम्मानित
विशेष रिपोर्ट श्यामल प्रतीक
गोपालगंज। मां के दरबार में चढ़ाए गए आभूषण केवल सोने-चांदी की वस्तुएं नहीं होते। उनके साथ किसी श्रद्धालु की मन्नत, किसी परिवार की कृतज्ञता और किसी की वर्षों पुरानी श्रद्धा जुड़ी होती है। थावे दुर्गा मंदिर में हुई चोरी इसलिए संपत्ति की क्षति से कहीं आगे, भक्तों की भावनाओं को चोट पहुंचाने वाली घटना थी। अब इस मामले में पांच दोषियों को मिली सजा ने न्याय और जवाबदेही की उम्मीद को मजबूत किया है।
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने चार दोषियों को सात-सात वर्ष की कैद और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पांचवें दोषी को तीन वर्ष की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
17 दिसंबर 2025 की रात मंदिर से मां भवानी का सोने का मुकुट, आभूषण और अन्य कीमती सामान चोरी हुआ था। जिस स्थान पर श्रद्धालु अपनी चिंताएं लेकर सुकून खोजने आते हैं, वहीं हुई इस वारदात ने मंदिर की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और मामले को स्पीडी ट्रायल के तहत आगे बढ़ाया गया।
इस फैसले के पीछे जांच और अभियोजन से जुड़ी टीम का निरंतर प्रयास भी रहा। सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल, तकनीकी सूचनाओं का विश्लेषण, बरामद आभूषणों की पहचान और अदालत के सामने साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया ने मामले को न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। एसपी विनय तिवारी के अनुसार, दोषियों को सजा दिलाने के लिए करीब आठ महीने तक स्पीडी ट्रायल की प्रक्रिया में लगातार प्रयास किए गए।
थावे मंदिर परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान एसपी ने इस कार्य में योगदान देने वाले पुलिसकर्मियों, तकनीकी टीम और अभियोजन से जुड़े अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र तथा नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। यह सम्मान उन प्रयासों की पहचान बना, जो जांच की शुरुआत से अदालत में दोषसिद्धि तक जारी रहे।
इस प्रकरण का भावनात्मक पक्ष भी गहरा है—श्रद्धालु मंदिर में केवल चढ़ावा नहीं चढ़ाते, अपना विश्वास भी रखते हैं। उस विश्वास की रक्षा के लिए संवेदनशील पुलिस व्यवस्था, ठोस जांच और प्रभावी न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका उतनी ही जरूरी है, जितनी मंदिर के द्वार पर सुरक्षा की।
