शिक्षा विभाग की माने तो 5 करोड़ रुपए की डिमांड से सरकार सकते में है। यदि एक स्कूल पर 5 करोड़ की राशि खर्च होती है तो कुल 2,860 करोड़ रुपए चाहिए। बिहार में 534 ब्लांक में 572 स्कूल को मॉडल रूप दिया जा रहा है।
बिहार के सरकारी स्कूलों में अच्छे प्राइवेट स्कूल जैसी पढ़ाई हो इसके लिए राज्य सरकार मॉडल स्कूल योजना लेकर आई। हर प्रखंड में एक मॉडल स्कूल बनाने की घोषणा हुई। इसके लिए पहले से चल रहे स्कूल को मॉडल श्रेणी में बदला जा रहा है। उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया जा रहा है।
सीएम सम्राट चौधरी की सरकार ने मॉडल स्कूल बनाने के लिए 800 करोड़ रुपए की राशि मंजूर कर ली है।
पहले जानिए क्या है मॉडल स्कूल का कॉन्सेप्ट?
मॉडल स्कूलों का उद्देश्य क्लास 9 से 12 तक के बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है। यहां पढ़ाई गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और इनोवेशन आधारित होनी है। प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल स्कूल विकसित किया जा रहा है।
मॉडल स्कूल में पढ़ाने के लिए शिक्षकों का चयन शिक्षा विभाग द्वारा पहले से तय मापदंड पर किया जा रहा है। इन स्कूलों में साइंस लैब, आईसीटी लैब, पुस्तकालय, डिजिटल स्क्रीन सहित स्मार्ट क्लास बनाए जा रहे हैं।
स्कूलों में कोचिंग की व्यवस्था होगी। मानक के अनुसार पर्याप्त कक्षाएं, स्कूल फर्नीचर, खेल सुविधाएं, बाउंड्री वॉल, पेयजल, हैंड वाश स्टेशन, लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाएं, हाई स्पीड इंटरनेट आदि उपलब्ध कराया जाएगा।
3 रूम के पढ़ते हैं 450 बच्चे, साइंस लैब के लिए जगह नहीं
नालंदा जिले के कराय-पशुराय ब्लॉक से 3-4 किलोमीटर दूर मकरौता टेन प्लस टू स्कूल है। इसे मॉडल स्कूल बनाया गया है। कुल 6 कमरे हैं। इन्हें दो हिस्से में बांटकर ऑफिस, कम्प्यूटर लैब, पुस्तकालय बना दिए गए हैं।
यहां पढ़ने वाले बच्चों की कुल संख्या 450 है। एडमिशन चल रहा है। संख्या बढ़ेगी। तीन कमरे में सभी बच्चों की पढ़ाई की जाती है।
स्कूल में साइंस लैब के लिए जगह नहीं है। महिला शिक्षिका और छात्राओं के लिए कॉमन रूम नहीं है। एक वाश रूम में टीचर तो दूसरे में बच्चे जाते हैं। स्कूल पहुंचे के लिए संकरी पीसीसी सड़क है। बारिश के दिनों में सड़क के नीचे 5 फीट तक पानी जमा होता है।
191 साल पुराना स्कूल, 1500 छात्रों के लिए हैं 20 कमरे
राजधानी पटना में अंग्रेजों के जमाने का पटना कॉलेजिएट स्कूल है। यहां कुल 20 कमरे हैं। अविभाजित बिहार के इस सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सरकारी स्कूल की स्थापना 10 अगस्त 1835 को ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों ने की थी। इसकी उम्र 191 साल हो गई है।
यहां क्लास 9-12 तक के बच्चे पढ़ते हैं। इस स्कूल से जयप्रकाश नारायण, बिधान चंद्र रे और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे दिग्गज हस्तियों ने पढ़ाई की है।
स्कूल में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के लैब और पुस्तकालय है। स्कूल में 44 कमरों का छात्रावास है। यहां 100 से अधिक छात्रों के रहने की व्यवस्था है। इस स्कूल को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। कुल 1500 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए 20 शिक्षक हैं।
एक स्कूल को मॉडल बनाने के लिए चाहिए 5 करोड़ रुपए
एक स्कूल को मॉडल बनाने के लिए चाहिए 5 करोड़ रुपए
मॉडल स्कूल की सुविधाएं बेहतरीन होंगी। पढ़ाई से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर वर्ल्ड क्लास का होगा। स्कूल के लिए जिलों से डिमांड भेजी जा चुकी है। इसमें कहा गया है कि एक स्कूल को मॉडल बनाने के लिए 5 करोड़ रुपए चाहिए। इस डिमांड की समीक्षा की जा रही है।
शिक्षा विभाग की माने तो 5 करोड़ रुपए की डिमांड से सरकार सकते में है। यदि एक स्कूल पर 5 करोड़ की राशि खर्च होती है तो कुल 2,860 करोड़ रुपए चाहिए। बिहार में 534 ब्लांक में 572 स्कूल को मॉडल रूप दिया जा रहा है।
सम्राट सरकार स्कूलों को मॉडल बनाने के लिए दिए 800 करोड़ रुपए
सम्राट सरकार ने स्कूलों को मॉडल बनाने के लिए 800 करोड़ रुपए दिए हैं। ये पैसे सभी 572 मॉडल स्कूल पर खर्च किए जाएंगे। यानी हर मॉडल स्कूल के हिस्से में 1.47 करोड़ रुपए आ सकते हैं। राशि स्कूल में उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से आवंटित की जाएगी।
मॉडल स्कूल की सुविधाएं बेहतरीन होंगी। पढ़ाई से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर वर्ल्ड क्लास का होगा। स्कूल के लिए जिलों से डिमांड भेजी जा चुकी है। इसमें कहा गया है कि एक स्कूल को मॉडल बनाने के लिए 5 करोड़ रुपए चाहिए। इस डिमांड की समीक्षा की जा रही है।
शिक्षा विभाग की माने तो 5 करोड़ रुपए की डिमांड से सरकार सकते में है। यदि एक स्कूल पर 5 करोड़ की राशि खर्च होती है तो कुल 2,860 करोड़ रुपए चाहिए। बिहार में 534 ब्लांक में 572 स्कूल को मॉडल रूप दिया जा रहा है।
सम्राट सरकार स्कूलों को मॉडल बनाने के लिए दिए 800 करोड़ रुपए
सम्राट सरकार ने स्कूलों को मॉडल बनाने के लिए 800 करोड़ रुपए दिए हैं। ये पैसे सभी 572 मॉडल स्कूल पर खर्च किए जाएंगे। यानी हर मॉडल स्कूल के हिस्से में 1.47 करोड़ रुपए आ सकते हैं। राशि स्कूल में उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से आवंटित की जाएगी।
