बिहार विधानसभा चुनावों में इस बार वोटों की गिनती का नया सिस्टम लागू किया गया है। चुनाव आयोग ने पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित करने के लिए कई तकनीकी बदलाव किए हैं।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब गिनती पूरी तरह डिजिटाइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत होगी। हर स्ट्रॉन्ग रूम में कैमरे लगाए गए हैं और गिनती स्थल तक ईवीएम मशीनों को ले जाने और वापस रखने की पूरी प्रक्रिया CCTV निगरानी में रहेगी। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम होगी।
गिनती के दौरान अब हर राउंड की जानकारी तुरंत ऑनलाइन अपलोड की जाएगी। पहले जहां जिला स्तर पर मैन्युअल संकलन होता था, वहीं अब रियल-टाइम डेटा निर्वाचन आयोग की केंद्रीय प्रणाली तक पहुंचाया जाएगा। इससे उम्मीदवार, राजनीतिक दल और आम मतदाता भी मोबाइल एप और वेबसाइट पर हर राउंड का अपडेट देख सकेंगे।
इस बार गिनती हॉल में ईवीएम के साथ-साथ VVPAT पर्चियों की जांच के लिए भी अलग टेबल और प्रशिक्षित कर्मचारी लगाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, हर विधानसभा क्षेत्र में 5 EVM मशीनों की VVPAT पर्चियों का मिलान अनिवार्य है, लेकिन बिहार में इसे और सख्ती से लागू करने का फैसला हुआ है।
गिनती प्रक्रिया में सुरक्षा बलों की तीन लेयर तैनात की गई है। पहले लेयर में केंद्रीय अर्धसैनिक बल, दूसरी में राज्य पुलिस और तीसरी में मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी रहेंगे। इससे उम्मीदवारों और समर्थकों के दबाव या हंगामे की संभावना काफी कम हो जाएगी।
इसके अलावा, मतगणना स्थल पर मीडिया कवरेज के लिए भी एक नियंत्रित व्यवस्था बनाई गई है। अलग मीडिया गैलरी और स्क्रीन पर डेटा प्रदर्शित होगा, ताकि रिपोर्टिंग पारदर्शी हो और गिनती प्रक्रिया में कोई व्यवधान न आए।
कुल मिलाकर, यह नया सिस्टम पुराने तरीके की तुलना में ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद माना जा रहा है। इससे न केवल नतीजे जल्दी आएंगे बल्कि चुनाव प्रक्रिया पर मतदाताओं का विश्वास भी मजबूत होगा।
बिहार चुनाव में वोटों की गिनती के लिए इस बार नया सिस्टम लागू किया गया है, जिसका मकसद पारदर्शिता, गति और विश्वसनीयता को और मज़बूत करना है। चुनाव आयोग ने परंपरागत प्रक्रिया में कई तकनीकी सुधार किए हैं ताकि नतीजों की घोषणा में किसी तरह की देरी न हो और संदेह की गुंजाइश भी कम से कम रहे।
मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:
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डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम:
हर मतगणना केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी। इससे चुनाव आयोग और राजनीतिक दल दोनों ही वास्तविक समय में गिनती की स्थिति देख सकेंगे। -
टैबलेट और सॉफ्टवेयर बेस्ड एंट्री:
पहले जहां रजिस्टर में हाथ से डाटा दर्ज होता था, अब हर टेबल पर गिनती के बाद आंकड़े सीधे टैबलेट में दर्ज किए जाएंगे। यह डेटा तुरंत कंट्रोल रूम और केंद्रीय सर्वर पर पहुंच जाएगा। इससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी। -
केंद्रीय डैशबोर्ड:
मतगणना केंद्रों से आने वाला हर आंकड़ा एक केंद्रीय डैशबोर्ड पर प्रदर्शित होगा। मीडिया और आम जनता को भी चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के जरिए अपडेट मिलेंगे। -
अलग-अलग राउंड की स्पष्ट जानकारी:
पहले मतगणना के राउंड खत्म होने के बाद आधिकारिक तौर पर जानकारी देने में देरी होती थी। अब हर राउंड की गिनती पूरी होते ही उसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। -
VVPAT स्लिप्स की गिनती का ऑटो-मैकेनिज्म:
जिन विधानसभा क्षेत्रों में वीवीपैट मशीनें लगी थीं, वहां उनकी स्लिप्स की गिनती के लिए मशीनरी और प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई है। इससे स्लिप मिलान की प्रक्रिया तेज होगी। -
सुरक्षा और निगरानी:
मतगणना स्थलों पर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पहले बाहरी घेरे में केंद्रीय बल, दूसरे घेरे में राज्य पुलिस और तीसरे घेरे में चुनाव आयोग की विशेष टीम होगी। -
टेक्नोलॉजी से जुड़े पारदर्शी उपाय:
डेटा एंट्री करने वाले ऑपरेटरों की पहचान बायोमेट्रिक और पासवर्ड से की जाएगी ताकि कोई भी बाहरी हस्तक्षेप न हो।
कुल मिलाकर नया सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि गिनती तेज़ी से हो, विवादों की गुंजाइश न रहे और जनता को भरोसा मिले कि चुनाव पूरी पारदर्शिता से कराए जा रहे हैं।
