PATNA के पटन देवी मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़

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PATNA शारदीय नवरात्र का पहला दिन आज, 9 साल बाद 10 दिनों तक होगी मां दुर्गा की उपासना

आज से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो रही है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री पूजा हो रही है। बिहार के सभी देवी मंदिरों में सुबह से भक्तों की भीड़ दिखाई दे रही है। पटना के प्रसिद्ध पटन देवी मंदिर के बाहर भी भक्तों की लंबी कतार है। मंदिर आने वाले रास्ते को भी सजाया गया है।

आज आश्विन शुक्ल प्रतिपदा में कलश स्थापना होगी। इस बार नवरात्र 10 दिन का होगा। पूरे 9 साल बाद इस वर्ष चतुर्थी तिथि दो दिन होने से 10 दिन तक देवी माता की उपासना होगी।

नवरात्र के पहले दिन का महत्व

शारदीय नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री पूजा की जाती है। गजकेसरी, बुधादित्य, शुक्ल, ब्रह्म योग और भद्र राजयोग में माता दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है। देवी भागवत पुराण के अनुसार देवी मां को हाथी पर आगमन शुभ, समृद्धि, आर्थिक उन्नति और विकास लाने वाला माना गया है।

नवरात्र में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

प्रतिपदा तिथि: देर रात 01:28 बजे तक हस्त नक्षत्र: दोपहर 11:35 बजे से पुरे दिन शुक्ल योग: रात्रि 08:58 बजे तक शुभ योग मुहूर्त: प्रातः 07:09 बजे से 08:41 बजे तक अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:18 बजे से 12:07 बजे तक चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: दोपहर 11:43 बजे से शाम 04:16 बजे तक।

बड़ी पटन देवी मंदिर का पौराणिक इतिहास और महत्व

पटना की बड़ी पटन देवी मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी सती की दाहिनी जंघा गिरी थी। इस मंदिर में काले पत्थर से बनी महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली की मूर्तियां स्थापित है। इन मूर्तियों को सतयुग का बना माना जाता है।

पटन देवी मंदिर के योनी हवन कुंड को लेकर मान्यता है कि यह हवन कुंड माता सती का पाताल लोक से सीधा संबंध स्थापित करता है। यही कारण है कि इस हवन कुंड में डाली गई सामग्री सीधे पाताल लोक में चली जाती है।

मान्यता है कि यह मंदिर पटना शहर की रक्षा करता है, इसीलिए इसे रक्षिका भगवती पटनेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है। 1912 में पटन देवी के नाम पर ही बिहार की राजधानी का नाम पटना रखा गया था।

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